भूकंप रोधी भवनों के निर्माण के लिए कारीगरों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण

जमुई से सरोज कुमार दुबे की रिपोर्ट

जिले के सोनो प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत प्रखंड मुख्यालय स्थित किसान भवन में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा भूकंपरोधी मकान निर्माण के लिए अंचलाधिकारी राजेश कुमार के नेतृत्व में प्रखंड क्षेत्र के राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ताकि प्रशिक्षण के बाद सभी राजमिस्त्री क्षेत्र में भूकंप रोधी मकानों का निर्माण अच्छे ढंग से कर सके । इस सात दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान अंचलाधिकारी राजेश कुमार ने बताया ने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थानीय राजमिस्त्रियों को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किए जाने की योजना है । उक्त योजना के तहत ही सभी राजमिस्त्रीयों को भूकंपरोधी भवन निर्माण से संबंधित तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है । क्योंकि बिहार में भूकंप बहुत ज्यादा आता है जिस कारण क्षेत्र की जनता को काफी नुकसान होता है अगर भूकंप से बचना है तो भूकंप रोधी मकान बनाना जरूरी है । भूकंप से होने वाले जान -माल की व्यापक क्षति को कम करने तथा सुदृढ़ भवन निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल कर हम संबंधित आपदा को कम कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सोनो में 30 राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस दौरान प्रत्येक राजमिस्त्री को प्रति दिन 700 रुपये की दर से यानी प्रशिक्षण अवधि के सात दिनों में कुल 4900 सौ रुपये दिए जाएंगे। मौके पर प्रशिक्षण प्रभारी इंजीनियर मो आदिल हुसैन ,इंजीनियर दीपक कुमार व मास्टर ट्रेनर सीताराम मुखिया ने बताया कि उक्त प्रशिक्षण आपदा प्रबंधन विभाग की महत्वाकांक्षी योजना का पहल है। भूकंप से निपटने के लिए तथा भूकंप के जोखिम को कम करने के लिए राज्य सरकार के निर्णय के आलोक में भूकंप रोधी भवनों के निर्माण तथा पुराने भवनों के सुदृढ़ीकरण के लिए राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित करने का कार्य बिहार राज्य के सभी जिलों में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण सात दिवसीय है, जिसमें भवन की आकृति,नीव के निर्माण, सामग्रियों के उपयोग, भंडारण एवं जांच की सरल विधि, ईंट को चार से छह घंटे पानी में भींगाकर ही उपयोग करने, छड़ बांधने की सही तकनीक। छड़ों को जंग से बचाने के लिए कभर ब्लाक लगाने, ईंट पॉकेट में छड़ खड़ा करने सहित आवश्यक जानकारी अभियंता प्रशिक्षकों द्वारा दिया जा रहा है। भूकंपरोधी निर्माण के बहू तकनीक के उपयोग को समावेशित करते हुए एक मॉडल भवन का निर्माण भी कराया जाता है जिसमें नए निर्माण तथा रेट्रोफिटिंग के विभिन्न तकनीक का प्रयोग राजमिस्त्रियों से कराए जाते हैं। साथ ही प्रोजेक्टर व स्क्रीन के साथ वर्ग कक्ष में प्रशिक्षण दी जाती है।

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