किताबों के बोझ तले दबा बचपन कौन पडता भारी किताब या पढ़ाई

जमुई से सरोज कुमार दुबे की रिपोर्ट

बच्चे देश का भविष्य है पढ़ाई के नाम पर सरकार बहुतो फंड निकाल रही है ।शिक्षा जगत मे विशेष ध्यान दे कर अरबो खरबो खर्च कर रही है ।फिर भी कुछ जगहो पर पढ़ाई नग्नय देखी जा सकती है । बहुत से सरकारी स्कूलो मे ऐसा भी देखा जाता है कि खुद शिक्षक को जानकरी नही है तो वह बच्चो को क्या पढाऐगे । ये सोचकर अभिभावक गन अपने बच्चे को किसी प्राइवेट स्कूल मे दाखिल कर देते है कि इसमे मेरा बच्चे को सही ज्ञान प्राप्त होगा पर उन्हे शायद यहां भी उनके साथ धोखा किया जा रहा है ।प्राइवेट संस्थानो मे बच्चे का बचपन किताबो के तले दब कर रह जाता है ।किताबो का इतना बोझ मिलता है कि बच्चे का सारा बिटामिन मिनरल प्रोटीन इत्यादि उसी में खर्च हो जाता है तो उसका मानसिक बिकास कब और कैसे होगा । किसी बच्चे ने सच ही कहा है कि प्राइवेट स्कूल का मतलब यह एक ऐसी जगह है जहाॅ हमलोगो को कुटा जाता है और अभिभावको को लुटा जाता है । यह बाते सभी स्कूलो मे लागु नहीं होता है । कुछ जगहो पर सही बैठता है । यह नजारा आप देख सकते हैं कि 1 बच्चे के ऊपर किताब का कितना बोझ रख दिया गया है जिसे वह ढोकर नहीं ले जा सकता है स्कूल पहुंचने के लिए उसे रास्ते में कई बार रखना पड़ता है तब वह बच्चा बैग लेकर स्कूल पहुंचता है स्कूल पहुंचते-पहुंचते उसकी सारी एनर्जी खत्म हो जाती है ।वह थक कर चुर हो जाता है । तो वह पढ़ाई फिर कैसे करेगा उसके लिए एनर्जी कहां से लाएगा

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