कोयला खदान क्षेत्र में बंद खदानों से निकल सकती है जल संकट का समाधान

– राज्यसभा में खीरू महतो ने उठाया उक्त मुद्दा


धनबाद : कोयला खदान क्षेत्र में पेयजल की व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग राज्यसभा में सांसद खीरू महतो ने उठाया है। इनका कहना है कि कोल इंडिया ने कोयला खनन क्षेत्र में लाखों एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया है। बड़े-बड़े ओपन कास्ट प्रोजेक्ट चल रहे हैं जिससे सैकड़ो गांव विस्थापित हुए हैं। इन विस्थापितों की समस्याओं का निदान करना भी कोल इंडिया की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। लेकिन इन क्षेत्रों में विस्थापितों को पेयजल की समुचित व्यवस्था अब तक नहीं कराई गई है।ऐसे में भूमि स्थापित परिवार पे जलश मूर्ति की गंभीर समस्या से जूझ रही है गांव में कुआं सूख गया है तथा चापाकल भी पानी की अभाव में जवाब दे चुका है।ऊपर से वायु प्रदूषण ने लोगों को जीना मुहाल कर दिया है। उन्होंने भारत सरकार से मांग की है कि कोयला खदान क्षेत्र जहां कई कोयला खदान बंद पड़े हैं। उन खदानों में एकत्रित जल का उपयोग क्षेत्र के निवासियों को पेयजल समस्या का समाधान निकल सकता है।इतना ही नहीं क्षेत्र में कोयला खनन के दौरान निकली ओ बी क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ रहा है जमा ओ बी से बड़े-बड़े पहाड़ बन गए हैं। क्षेत्र में एकत्रित ओ बी कि अगर समुचित व्यवस्था कर दी जाए तो इससे कोयला खदान क्षेत्र के लोगों को प्रदूषण से राहत मिलेगी और वह चैन की जिंदगी जी सकेंगे। दूसरी तरफ बंद कोयला खदान में जमी जल का का सफाई करके उसे क्षेत्र के स्थानीय लोगों को आपूर्ति की जा सकती है इससे उन्हें जलापूर्ति के संकट से समाधान मिलेगा।इसको लेकर सिंफर के वैज्ञानिकों ने भी सहमति जताते हुए योजना बना रखी है जरूरत है उसे अमली जामा पहना कर कार्यान्वित करने की। श्री महतो ने इन बिंदुओं पर भारत सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।

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