सीयूएसबी में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाई गई




गया दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षक-शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय के ही इंस्टीटयूशन इनोवेशन कौंसिल के सयुंक्त तत्वावधान में दिनांक ११ नवम्बर २०२१ को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में एक ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया हैI इस कार्यक्रम का आयोजन भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री एवं शिक्षाविद मौलाना अबुल कलम आज़ाद के जन्मदिवस की स्मृति में किया गया हैI इस कार्यक्रम का उद्देश्य मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के राष्ट्र के विकास एवं शिक्षा के क्षेत्र में किये गये योगदान से सभी को परिचित कराना और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में उनके दर्शन को आत्मसात करने की प्रेरणा के लिए किया गया थाI प्रोफेसर कौशल किशोर ने कार्यक्रम का शुभारम्भ अपने स्वागत उद्बोधन से कियाI कार्यक्रम के वक्ता जय प्रकाश विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं विद्वान शिक्षाविद प्रोफेसर हरिकेश सिंह थेI प्रोफेसर हरिकेश सिंह ने मौलाना आज़ाद के महान व्यक्तित्व से सभी को परिचित कराया और कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालाI उन्होंने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में मौलाना आज़ाद के व्यक्तित्व और कृतित्व के विभिन्न पक्षों को उद्घाटित कियाI उन्होंने बताया कि किस प्रकार मौलाना आज़ाद के शिक्षा मंत्री रहने के दस साल भारतीय आधुनिक शिक्षा के अभिकल्प निर्माण में महत्वपूर्ण हैI उन्होंने बताया कि शिक्षा और संस्कृति पर अंग्रेजों के पिछले २०० सैलून के प्रभाव को मिटाकर देशज संस्कृति से जुडी देशजएवं आधुनिक शिक्षा की योजना और उसका क्रियान्वयन किस प्रकार चुनौती पूर्ण था,लेकिन मौलाना आज़ाद के कुशल नेतृत्व में हम उस दिशा में बढ़ने में सक्षम हो सकेI राष्ट्रीय और देशज शिक्षा के निर्माण में मौलाना का दर्शन गाँधी, ज़ाकिर हुसैन और आचार्य नरेन्द्र देव के साथ खड़ा होता हैI उन्होंने यह भी बताया कि मौलाना गाँधी के स्वराज के अनुयायी थे और उन्होंने देश विदेश भरमान करके यह समझने की कोशिश की कि शिक्षा को किस प्रकार क्रांति और परिवर्तन का हथियार बनाया जा सकता हैI विद्वान व्याख्याता ने यह स्पष्ट तौर पर रेखांकित किया कि मौलाना आज़ाद भारत के किसी भी आधार पर विभाजन के पूर्ण रूप से खिलाफ थेI उन्हें भारत की समरस और गंगा जमुनी तहजीब पर अटूट आस्था थीI अपने विषद अध्ययनों द्वारा वह भारत के लिए एक ऐसी मौलिक और रैडिकल शिक्षा व्यवस्था की स्थपना करना चाहते थे जो अपनी प्रकृति में आधुनिक, वैज्ञानिक और देशज भी होI उन्होंने रेखांकित किया कि मौलाना आज़ाद देशज शिक्षा और साहित्य जिसमें अरबी, फ़ारसी, संस्कृत वेद-पुराण को बचाने एवं उनके विस्तार के लिए प्रतिबद्ध रहे इसीलिए उन्होंने नेशनल आर्काइव्ज और नेशनल म्यूजियम की स्थपना करवाईI विद्वान व्याख्याता ने बताया की विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनिकी शिक्षा सभी के लोए मौलाना के नेतृत्व में बहुत ही महतवपूर्ण कार्य हुए और देश के अधिकांश शिक्षा और शोध के संस्थान उनके अपने विज़न का हिस्सा रहेI ग्रामीण विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय, आई आई टी सब उनकी ही परियोजना का हिस्सा हैंI असल में मौलाना आज़ाद आधुनिक भारतीय शिक्षा के राष्ट्रवादी एवं प्रतिबद्ध निर्माता हैंI प्रो हरिकेश सिंह ने कहा कि मौलाना आज़ाद स्वदेशी चिंतन के महानायक हैं अतः हम जिस भी शिक्षा और समाज की संरचना की ओर बढ़ें उसके मूल में मौलाना की शिक्षा और समाज की परिकल्पना को ध्यान में रखकर बढे और इस
कार्यक्रम की अध्यक्षता दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह ने कीI प्रोफेसर सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि विजन और मिशन के बिना ज़िन्दगी का कोई महत्व नहीं है अतः मौलाना आजाद का विजन और मिशन हमें दिशा दे सकता हैI अध्यक्ष ने यह भी कहा कि कैंपस और कम्युनिटी के बीच की दूरी को ख़त्म करने कि आवश्यकता है जिसकी दिशा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-२०२० देती हैI उन्होंने नीति के चार सूत्र : इक्विटी, क्वालिटी, एक्सेसिबिलिटी और एकाउंटेबिलिटी को मूल मंत्र के रूप में लिए जाने की प्रेरणा दीI है इस कार्यक्रम का समापन इंस्टीटयूशन इनोवेशन कौंसिल के अध्यक्ष प्रोफेसर वेंकटेश सिंह के धन्यवाद ज्ञापन से हुआI कार्यक्रम का संचालन शिक्षा पीठ की सहायक प्राध्यापक डॉ स्वाति गुप्ता ने कियाI कार्यक्रम के सफल आयोजन में कल्चरल और लिटरेरी समिति के सभी शिक्षक और विद्यार्थी सदस्यों की भूमिका महतवपूर्ण रही है इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ शिक्षक, अफसर,शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे हैं इस कार्यक्रम में शिक्षा पीठ के सभी अध्यापकों की उपस्थिति से कार्यक्रम सफल हुआ हैI

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