नव वर्ष सामने परंतु तोपचांची झील के शौचालय पर लटका है तीन वर्षों से ताला

तोपचांची: झील में आने वाले सैलानियों के समक्ष सबसे बड़ी परेशानी शौचालय की होती है भीड़-भाड वाले समय में उन्हें शर्मसार होना पड़ता है इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए भूतपूर्व सासंद रविन्द्र पांडेय तथा भूतपूर्व विधायक राजकिशोर महतो के पहल पर झील परिसर में शौचालय का निर्माण करवाया गया । ताकि दुर दराज से आने वाले पर्यटकों को समस्या का सामना ना करने पड़े । झील परिसर में दो यूनिट महिला तथा पुरुष के शौचालय निर्माण करवाया गया है। परंतु विडम्बना की बात यह है कि तीन साल बीत जाने के बाद भी शौचालय में ताला ही लटका हुआ है ।
सरकारी राशि का दुरूपयोग: अगर आप सरकारी राशि का दुरूपयोग देखना चाहते हैं तो तोपचांची प्रखंड चले आएं । लाखों की लागत से झील परिसर में शौचालय का निर्माण करवाया गया ताकि दुर दराज से आए सैलानियों को शौचालय जैसी समस्या का सामना नहीं करना पड़े । झील परिसर में करीब २८ लाख की लागत से शौचालय का निर्माण करवाया गया था। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण शौचालय में ताला लटका हुआ है। सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार शौचालय को चालू कराने के लिए बोरिंग कराया गया परंतु बेरिंग असफल हो गया। पानी की व्यवस्था नहीं रहने के कारण माडा ने भी शौचालय को लेने से इन्कार कर दिया ।वहीं सदानंद महतो आजसू किसान प्रकोष्ठ के जिला सचिव ने कहा कि तोपचांची झील परिसर में पर्यटकों के लिए स्वर्गीय राजकिशोर महतो के मद के द्वारा जिला अनावृत फंड से महिला एवं पुरुष दो यूनिट शौचालय निर्माण करवाया गया था। उन्होंने विभाग को जल्द हैंडोवर लेने की बात कही है ताकि तोपचांची झील में बंगाल ,बिहार, झारखंड के विभिन्न जिलों से पर्यटक आते हैं। खास कर महिला पर्यटकों को काफी समस्या होती है विभाग को जल्द इस समस्या को देखते हुए सारा व्यवस्था करके नव वर्ष से पहले शौचालय का ताला खोल दे ताकि दुर दराज से पहुंचे पर्यटकों को कोई समस्या नहीं हो । शौचालय निर्माण होने के बावजूद भी अभी तक उपयोगी साबित नहीं हुआ है । झामाडा इसको अपने हैंड मे लेकर अपने अस्तर से चलाएं या फिर आसपास में सहकारिता विभाग का कई महिला समूह बना हुआ है। महिला समूह द्वारा सिस्टमैटिक तरीका से चलाया जाए।

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